Friday, March 19, 2010

BHARAT RATNA


भारत में अन्‍नत काल से बहादुरी की अनेक गाथाओं को जन्‍म दिया है। संभवत: उनके बलिदानों को मापने का कोई पैमाना नहीं है, यद्यपि हम उन लोगों से भी अपनी आंखें फेर नहीं सकते जिन्‍होंने अपने-अपने क्षेत्रों में उत्‍कृ‍ष्‍टता प्राप्‍त कर हमारे देश का गौरव बढ़ाया है और हमें अंतरराष्‍ट्रीय मान्‍यता दिलाई है। भारत रत्‍न हमारे देश का उच्‍चतम नागरिक सम्‍मान है, जो कला, साहित्‍य और विज्ञान के क्षेत्र में असाधारण सेवा के लिए तथा उच्‍चतम स्‍तर की लोक सेवा को मान्‍यता देने के लिए प्रदान किया जाता है।
इस पुरस्‍कार के रूप में दिए जाने वाले सम्‍मान की मूल विशिष्टि में 35 मिलिमीटर व्‍यास वाला गोलाकार स्‍वर्ण पदक, जिस पर सूर्य और ऊपर हिन्‍दी भाषा में ''भारत रत्‍न'' तथा नीचे एक फूलों का गुलदस्‍ता बना होता है पीछे की ओर शासकीय संकेत और आदर्श-वाक्‍य लिखा होता है। इसे सफेद फीते में डालकर गले में पहनाया जाता है। एक वर्ष बाद इस डिजाइन को बदल दिया गया था।
भारत रत्‍न पुरस्‍कार की परम्‍परा 1954 में शुरु हुई थी। सबसे पहला पुरस्‍कार प्रसिद्ध वैज्ञानिक चंद्र शेखर वेंकटरमन को दिया गया था। तब से अनेक विशिष्‍ट जनों को अपने-अपने क्षेत्र में उत्‍कृष्‍टता पाने के लिए यह पुरस्‍कार प्रस्‍तुत किया गया है। वास्‍तव में हमारे वर्तमान राष्‍ट्रपति, डॉ. ए. पी. जे. अब्‍दुल कलाम को भी यह प्रतिष्ठित पुरस्‍कार दिया गया है (1997)। इसका कोई लिखित प्रावधान नहीं है कि भारत रत्‍न केवल भारतीय नागरिकों को ही दिया जाए। यह पुरस्‍कार स्‍वाभाविक रूप से भारतीय नागरिक बन चुकी एग्‍नेस गोंखा बोजाखियू, जिन्‍हें हम मदर टेरेसा के नाम से जानते है और दो अन्‍य गैर-भारतीय - खान अब्‍दुल गफ्फार खान और नेल्‍सन मंडेला (1990)। यह भी अनिवार्य नहीं है कि भारत रत्‍न सम्‍मान हर वर्ष दिया जाए। पिछली बार यह सम्‍मान वर्ष 2008 में पंडित भीमसेन गुरूराज जोशी।

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