Sunday, April 11, 2010

इन्दीवर

जिंदगी से बहुत प्यार हमने किया
मौत से भी मोहब्बत निभाएंगे हम
रोते रोते ज़माने में आये मगर
हसंते हसंते ज़माने से जायेंगे हम .....
जिंदगी के अनजाने सफर से बेहद प्यार करने वाले हिन्दी सिने जगत के मशहूर शायर और गीतकार इंदीवर का जीवन से प्यार उनकी लिखी हुई इन पंक्तियों में समाया हुआ है। श्यामलाल बाबू राय उर्फ इंदीवर का जन्म झांसी मे 1924 मे हुआ था। बचपन से ही वह गीतकार बनने का सपना देखा करते थे और अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए वह मुंबई आ गए।
बतौर गीतकार सबसे पहले 1946 में प्रदर्शित फिल्म डबल क्रास में उन्हें काम करने का मौका मिला लेकिन फिल्म की असफलता से वह कुछ खास पहचान नही बना पाए। अपने वजूद को तलाशते इंदीवर को गीतकार के रूप में पहचान बनाने के लिए लगभग पांच वर्ष तक फिल्म इंडस्ट्री में संघर्ष करना पड़ा। इस दौरान उन्होंने कई बी और सी ग्रेड की फिल्मे भी की।
वर्ष 1951 मे प्रदर्शित फिल्म मल्हार की कामयाबी से वह गीतकार के रूप में कुछ हद तक वह अपनी पहचान बनाने मे सफल हो गए। इस फिल्म का गीत बड़े अरमानो से रखा है बलम तेरी कसम... श्रोताओं के बीच आज भी लोकप्रिय है। वर्ष 1963 मे बाबूभाई मिस्त्री की संगीतमय फिल्म पारसमणि की सफलता के बाद इंदीवर शोहरत की बुंलदियो पर जा पहुंचे।
इंदीवर की जोडी़ निर्माता निर्देशक मनोज कुमार के साथ बहुत जमी। मनोज कुमार ने सबसे पहले उनसे फिल्म उपकार के लिए गीत लिखने की पेशकश की। कल्याणजी आनंद जी के संगीत निर्देशन में उपकार के लिए इंदीवर ने कस्मेवादे प्यार वफा... जैसे दिल को छू लेने वाले गीत लिखकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इसके अलावा मनोज कुमार की फिल्म पूरब और पश्चिम के लिए भी उन्होंने दुल्हन चली वो पहन चली... और कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे.... जैसे सदाबहार गीत लिखकर अलग ही समां बांधा।
संगीतकार जोडी़ कल्याणजी आनंद जी के साथ भी जोडी़ उनकी खूब जमी। छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए...,चंदन सा बदन... और मैं तो भूल चली बाबुल का देश... जैसे इंदीवर के लिखे कभी न भूलने जा सकने गीतों को कल्याण जी आनंद जी ने ही संगीत दिया। वर्ष 1970 मे विजय आनंद निर्देशित फिल्म जानी मेरा नाम में नफरत करने वालो के सीने मे प्यार भर दू..., पल भर के लिए कोई मुझे प्यार कर ले... जैसे रूमानी गीत लिखकर इंदीवर ने श्रोताओ का दिल जीत लिया।
मनमोहन देसाई के निर्देशन में फिल्म सच्चाझूठा के लिए इंदीवर का लिखा एक गीत मेरी प्यारी बहनिया बनेगी दुल्हनिया.. को आज भी शादी के मौके पर सुना जा सकता है। इसके अलावा फिल्म राजेश खन्ना अभिनीत फिल्म सफर के लिए उन्होंने जीवन से भरी तेरी आखें... और जो तुमको हो पसंद... जैसे गीत लिखकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
जाने माने निर्माता निर्देशक राकेश रोशन की फिल्मों के लिए इंदीवर ने सदाबहार गीत लिखकर उनकी फिल्मों को सफल बनाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके सदाबहार गीतों के कारण ही राकेश रोशन की ज्यादातार फिल्मे आज भी याद की जाती है। इन फिल्मो में खासकर कामचोर [1982], खुदगर्ज [1987], खून भरी मांग [1988], कालाबाजार [1989], किशन कन्हैया [1990], किंग अंकल [1993], करण अर्जुन [1995] और कोयला [1997] जैसी फिल्में शामिल हैं। राकेश रौशन के अलावा उनके पसंदीदा निर्माता निर्देशकों में मनोज कुमार फीरोज खान आदि प्रमुख रहे है। इंदीवर के पसंदीदा संगीतकार के तौर पर कल्याण जी आनंद जी का नाम सबसे ऊपर आता है। कल्याणजी आनंदजी के संगीत निर्देशन में उनके के गीतों को नई पहचान मिली। शायद कल्याणजी आनंदजी इंदीवर के दिल के काफी करीब थे। सबसे पहले इस जोडी़ का गीत संगीत 1965 में प्रदर्शित फिल्म हिमालय की गोद में पसंद किया गया। इसके बाद इंदीवर द्वारा रचित फिल्मी गीतों में कल्याणजी आनंदजी का ही संगीत हुआ करता था।
ऐसी फिल्मों में उपकार, दिल ने पुकारा, सरस्वती चंद्र, यादगार, सफर, सच्चा झूठा, पूरब और पश्चिम जॉनी मेरा नाम, पारस, उपासना, कसौटी, धर्मात्मा, हेराफेरी, डॉन, कुर्बानी, कलाकार आदि शामिल है। इंदीवर के अन्य पसंदीदा संगीतकारों में बप्पी लाहिडी़ और लक्ष्मीकांत प्यारे लाल जैसे संगीतकार शामिल है। उनके गीतों को किशोर कुमार, आशा भोंसले, मोहम्मद रफी और लता मंगेश्कर जैसे चोटी के गायक कलाकारों ने अपने स्वर से सजाया है।
वर्ष 1975 में प्रदर्शित फिल्म अमानुष के लिए इंदीवर को सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्म फेयर पुरस्कार दिया गया। उन्होंने अपने सिने कैरियर में लगभग 300 फिल्मों के लिए गीत लिखे। लगभग तीन दशक तक अपने गीतों से श्रोताओं को भावविभोर करने वाले इंदीवर 27 फरवरी 1999 को सदा के लिए अलविदा कह गऐ।

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